सर्वोच्च न्यायालय ने 13 अप्रैल 2026 को एक महत्वपूर्ण निर्णय में कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस 2016 के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें प्रवासी भारतीयों (NRIs) को उनकी भूमि से वंचित करने के बड़े षड्यंत्र से संबंधित आपराधिक कार्यवाही को प्रारंभिक अवस्था में ही समाप्त कर दिया गया था।

प्रकरण में अपीलार्थी अक्कम्मा सैम जैकब सहित अन्य प्रवासी भारतीय खरीदारों ने बेंगलुरु के डोड्डागुब्बी ग्राम, सर्वे नं. 12 में स्थित "अथीना टाउनशिप – स्टेज I" में आवासीय भूखंड खरीदे थे। आरोप था कि अभियुक्तों ने जाली जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी, फर्जी विक्रय पत्र और धोखे से हस्ताक्षरित पुष्टि-विलेख (Confirmation Deed) के माध्यम से उनकी संपत्तियों पर कब्जा कर लिया।

पुलिस द्वारा शिकायत दर्ज न किए जाने पर मजिस्ट्रेट के पास शिकायत प्रस्तुत की गई, जिन्होंने धारा 156(3) CrPC के अंतर्गत FIR दर्ज कर जांच के आदेश दिए। उच्च न्यायालय ने धारा 482 CrPC के तहत कार्यवाही को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि विवाद सिविल प्रकृति का है और धारा 31, Specific Relief Act के अंतर्गत विक्रय पत्रों को निरस्त किए बिना आपराधिक कार्यवाही नहीं चल सकती।

अपीलार्थियों ने तर्क दिया कि शिकायत में ठगी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र के स्पष्ट संज्ञेय अपराध प्रकट होते हैं और उच्च न्यायालय ने प्रारंभिक चरण में ही अभियुक्तों के बचाव पक्ष के दस्तावेजों का परीक्षण कर "मिनी-ट्रायल" कर दी। प्रतिवादी-अभियुक्तों ने कहा कि विवाद पूर्णतः सिविल प्रकृति का है और आपराधिक कार्यवाही कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

न्यायालय ने नीहारिका इंफ्रास्ट्रक्चर (प्रा.) लि. बनाम महाराष्ट्र राज्य [(2021) 19 SCC 401] का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि धारा 482 CrPC की शक्ति का प्रयोग अत्यंत सावधानी से केवल उन्हीं मामलों में होना चाहिए जहाँ शिकायत में कोई संज्ञेय अपराध न हो। धारा 156(3) CrPC के अंतर्गत केवल यह देखना होता है कि क्या शिकायत में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध प्रकट होता है। अभियुक्तों के दस्तावेजों का परीक्षण करना स्पष्ट रूप से अनुचित था।

सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय का 28 सितंबर 2016 का आदेश निरस्त करते हुए FIR एवं समस्त आपराधिक कार्यवाही को संबंधित पुलिस थाने और मजिस्ट्रेट के समक्ष विधि अनुसार पुनः बहाल किया। सभी पक्षों को अपना पक्ष उचित चरण में प्रस्तुत करने की छूट दी गई।

Case Details:

Case no.: Criminal Appeal Nos. of 2026 (arising from SLP (Crl.) Diary No. 20175 of 2022 & connected matters)

Bench: Justice Vikram Nath & Justice Sandeep Mehta

Appellant: Accamma Sam Jacob & Ors.

Respondents: The State of Karnataka & Ors. 

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